IPO से पहले NSE CEO का स्पष्टीकरण: अपने प्लेटफॉर्म पर शेयरों की ट्रेडिंग के लिए SEBI को नहीं भेजा कोई आवेदन

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के CEO ने साफ किया है कि अपने ही प्लेटफॉर्म पर खुद के शेयरों की ट्रेडिंग की इजाजत के लिए SEBI के पास कोई आवेदन दाखिल नहीं किया गया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब NSE अपने IPO की तैयारियों में जुटा हुआ है।
CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इस बात की पुष्टि की है कि उसने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति के लिए कोई आवेदन नहीं किया है।
यह ऐलान NSE के बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की तैयारियों के बीच आया है। यह IPO 17 से 21 सितंबर, 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा।
एंकर इनवेस्टर्स के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 16 सितंबर, 2026 से शुरू होगी, जबकि NSE के शेयरों की लिस्टिंग 24 सितंबर, 2026 को होने के आसार हैं।
आगामी IPO की तैयारियों के बीच NSE ने दी सफाई
IPO से ठीक पहले NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आशीषकुमार चौहान ने साफ तौर पर कहा कि फिलहाल एक्सचेंज की ऐसी कोई योजना नहीं है कि वह अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग के लिए SEBI से मंजूरी मांगे। चौहान ने भरोसा दिलाया कि NSE सभी नियम-कायदों और नियामकीय शर्तों का पूरी तरह से पालन करेगा।
इस IPO के लिए प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया गया है।
SEBI के मार्केट स्ट्रक्चर में बदलावों का असर
चौहान ने SEBI द्वारा मार्केट स्ट्रक्चर में हाल में किए गए बदलावों के असर पर भी बात की। उन्होंने माना कि कैलिब्रेटेड एडिशनल सर्विलांस (CAS) जैसे कदमों से ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ा है।
इसके साथ ही उन्होंने SEBI के पहले लागू किए गए कुछ कड़े नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही शुरुआत में वे चुनौतीपूर्ण लगे हों, लेकिन आगे चलकर उनसे बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ी और उनकी सुरक्षा भी मजबूत हुई।
NSE की उपलब्धियां और वित्तीय प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चौहान ने NSE को एक टेक्नोलॉजी-संचालित एक्सचेंज बताया, जो वक्त के साथ एक मजबूत और व्यापक फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभरा है।
मार्च 2026 तक NSE ने ₹10,300 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 15% कम है। हालांकि, ऑप्शंस ट्रेडिंग में जोरदार उछाल के दम पर एक्सचेंज का रेवेन्यू बढ़कर ₹18,700 करोड़ पर पहुंच गया।
मौजूदा समय में कैश इक्विटी मार्केट में NSE की हिस्सेदारी लगभग 95% और इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में 75% है।
ग्लोबल डेरिवेटिव्स मार्केट में NSE का दबदबा
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में ट्रेड किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या के आधार पर NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है। ग्लोबल स्टॉक इंडेक्स ऑप्शंस के कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम में अकेले NSE की हिस्सेदारी करीब 89% है।
NSE की यह तेज बढ़त भारत में बढ़ते वित्तीयकरण के व्यापक रुझान को दर्शाती है, जहां राष्ट्रीय बचत का बड़ा हिस्सा पूंजी बाजारों की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
NSE की IPO से जुड़ी तैयारियां और उसकी व्यावसायिक रणनीति कैश इक्विटी, डेरिवेटिव्स के साथ-साथ अलग-अलग एसेट क्लासेज में उसकी मजबूत पकड़ को साफ दिखाती हैं।
रेवेन्यू का ₹18,700 करोड़ तक पहुंचना ऑप्शंस ट्रेडिंग में आई तेज रफ्तार को जाहिर करता है, वहीं डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के मामले में ग्लोबल लेवल पर भी NSE का दबदबा कायम है।
प्रकाशित:: 14 Sept 2026, 11:18 pm IST

Team Angel One
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